भारत का पहला महिला मैकेनिक गैराज !

महिला मकेनिक सुन कर थोडा अजीब सा लगा – फिर सोचा के सच में ऐसा हो सकता है, जा कर ही देखना पड़ेगा जब मैं वहां पहुंचा तो वाकई यह सच था| उस गेराज में करीब ६ 7 महिलाएं फर्राटे से काम कर रही थी, उन में एक हेड मकेनिक भी थीं जो फ़ोन पर सामान लिखवा रहीं थीं, उम्र मेरे ख्याल से 24 साल रही होगी, यह शिवानी हैं “इस महिला गेराज की हेड मकेनिक” |

ऐसा लग नहीं रहा था के मैं किसी अनाड़ी गेराज पर हूँ, पिट पर चढ़ी हुई मोटरसाइकिल पर एक बंदी उस गाड़ी का शायद इंजान ही खोल रही थी, मतलब में वेसे काफी खुले विचारों का हूँ पर यह देख कर मैं भी थोड़ा अचम्भित था |

यह पहल की है “सामान सोसाइटी”NGO के मार्फ़त, श्रे राजेंद्र बंधू जो पिछले ३५ सालों से समाज सेवा करते आ रहे हैं, जो पेशे से वकील भी हैं, यह सामान सोसाइटी का विचार उनको अपनी वकालत करते रहने के दौरान आया, उनके पास कई तलाक के प्रकरण आते रहते थे और उन्होंने महिलाओं की बेबसी देखि की किस तराहं महिलाएं अपने भरण पाचन के लिए अदालत के चक्कर लगाती रहती हैं कई कई सालों तक लेकिन उनको कुछ हासिल नहीं होता| इस ही विडंम्बना के चलते राजेन्द्र जी ने एक NGO बना कर महिलाओं को आत्म निर्भर करने की बनाने के लिए एक क़दम रखा और आज सामान सोसाइटी के तेहत कई महिलाएं अपने रोज़गार से लगी हुई हैं और समाज में अपना खुद का मुकाम बना रही हैं | इस महिला गेराज की कहानी मेरे लिए काफी प्रेरणा दायक रही |

1 Comment

  1. Sunil Joshi says:

    ऐसे ही आगे बढ़ते रहो, देश को आप जैसी बेटियों पर नाज़ है, वाह! वाकई गर्व की बात है, महिलाओं के लिए एक नई मिसाल!

Leave a Reply to Sunil Joshi Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Interested? Let's talk now!


    This will close in 0 seconds