प्रवासी मजदूर से सफल उद्यमी तक: भूरी सिंगाड़ की कहानी जो सिखाती है ‘हार नहीं माननी

​महिला दिवस विशेष श्रृंखला: हर महिला के जीवन में कई संघर्ष होते हैं, लेकिन कुछ महिलाएँ उन संघर्षों को ही अपनी सबसे बड़ी शक्ति बना लेती हैं। मिलिए मध्य प्रदेश के पेटलावद की 39 वर्षीय भूरी सिंगाड़ से, जिन्होंने शैक्षिक योग्यता की कमी और आर्थिक तंगी जैसी हर बाधा को पार करते हुए न सिर्फ अपना जीवन बदला, बल्कि आज कई अन्य ग्रामीण महिलाओं के लिए रोज़गार का स्रोत बन गई हैं।

​संघर्ष का मैदान: गुजरात से घर वापसी

​मध्य प्रदेश के गुनावद गाँव की रहने वाली भूरी का बचपन आर्थिक रूप से पिछड़े परिवार में बीता। पढ़ने की तीव्र इच्छा होने के बावजूद, वह कभी स्कूल नहीं जा पाईं। गाँव में सिंचाई के साधन न होने के कारण, भूरी और उनके पति राजू को 2022 तक गुजरात में खेतिहर मज़दूरी करने के लिए मजबूर होना पड़ा, जहाँ वे प्रवासी मजदूर के रूप में काम करते थे। ​भूरी के जीवन में परिवर्तन तब आया जब वह मार्च 2022 में गाँव लौटीं और नारी अधिकार केंद्र (NAK) की बैठक में 'ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI)' द्वारा संचालित उद्यमिता प्रेरणा प्रशिक्षण (EMT) कार्यक्रम के बारे में सुना।

​सशक्तिकरण का जन्म: 'दोना पत्तल' इकाई

​प्रशिक्षण लेने के बाद, भूरी और उनके पति ने गाँव में पर्यावरण-अनुकूल कागज़ के बर्तन बनाने की 'दोना पत्तल' इकाई शुरू करने का फैसला किया। इसका मुख्य कारण था कि आस-पास के गाँवों में ऐसी कोई इकाई मौजूद नहीं थी।

​TRI और NAK का सहयोग: इन संगठनों ने भूरी को एक व्यावसायिक योजना बनाने, मौजूदा इकाइयों का दौरा करने और वित्तीय एवं तकनीकी सहायता प्राप्त करने में मदद की। ​प्रवासी मजदूर बनने से इंकार: भूरी को गुजरात के ठेकेदारों से लगातार वापस आने के फोन आते रहे, लेकिन उन्होंने उन सभी को मना कर दिया। उन्होंने अपनी दोना पत्तल इकाई के सपने को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प दिखाया।

​आर्थिक आज़ादी और प्रेरणा की किरण

​भूरी सिंगाड़ के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि उनके छोटे से उद्यम से मिलने वाली आर्थिक आज़ादी का एहसास है। वह गर्व से कहती हैं: "भले ही यह कोई बड़ी कमाई न हो, लेकिन मुझे खुशी है कि मेरे पास खुद का पैसा है, और मैं अपने परिवार को एक अच्छा जीवन स्तर पाने में मदद कर रही हूँ।

​आज, वह अपने शुरुआती ऋण को चुका चुकी हैं और अब बड़ी ऑर्डर पूरा करने के लिए अपने उद्यम का विस्तार करने की योजना बना रही हैं। भूरी सिंगाड़ की कहानी समाज के सभी लोगों के लिए एक संदेश है— शिक्षा की कमी या आर्थिक तंगी आपके हौसले को नहीं रोक सकती। वह ग्रामीण समुदायों की और भी महिलाओं को आर्थिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहती हैं।

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