नई दिल्ली में आयोजित वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप 2025 में भारतीय दल ने अपने अभियान का शानदार और ऐतिहासिक अंत किया। चैंपियनशिप के इतिहास में भारत ने पहली बार 22 पदकों का आंकड़ा छूकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज किया। इस दल ने छह स्वर्ण, नौ रजत और सात कांस्य पदक जीते, जो कोबे 2024 में जीते गए 17 पदकों के पिछले रिकॉर्ड से कहीं अधिक है।
सिमरन शर्मा (रजत): महिलाओं की 200 मीटर T12 स्पर्धा में उन्होंने गाइड उमर सैफी के साथ 24.46 सेकंड का एशियाई रिकॉर्ड समय दर्ज किया और रजत पदक जीता। इससे पहले, वह 100 मीटर T12 स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं।
प्रीति पाल (रजत): महिलाओं की 100 मीटर T35 इवेंट में प्रीति ने 14.33 सेकंड के साथ सीज़न का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए रजत पदक हासिल किया। वह पहले ही 200 मीटर T35 में कांस्य पदक जीत चुकी थीं। प्रीति पाल, दो पैरालंपिक ट्रैक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भी हैं।
नवदीप सिंह (रजत): पुरुषों की भाला फेंक F41 स्पर्धा में नवदीप ने 45.46 मीटर का थ्रो कर रजत पदक जीता। संदीप (कांस्य): पुरुषों की 200 मीटर T44 इवेंट में कागज़ पर सबसे धीमे धावक माने जा रहे संदीप ने 23.60 सेकंड के व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ समय के साथ कांस्य पदक जीतकर सबको चौंका दिया।
भारतीय महिला पैरा एथलीटों का प्रदर्शन विशेष रूप से सराहनीय रहा। मध्यम दृष्टिबाधित वर्ग (T12) की सिमरन शर्मा ने न केवल रजत जीता, बल्कि एक नया एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। वहीं, समन्वय संबंधी विकार वाले एथलीटों के वर्ग (T35) में प्रीति पाल ने लगातार दूसरा पदक हासिल किया।
इस 12वें संस्करण में 104 देशों के 2000 से अधिक एथलीटों ने भाग लिया। 73 सदस्यीय भारतीय दल ने जिस तरह का प्रदर्शन किया, वह देश में नेत्रहीन और पैरा एथलेटिक्स के विकास और पहचान की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह ऐतिहासिक जीत भारत की निरंतरता, प्रतिभा और अंतर्राष्ट्रीय खेल मंच पर बढ़ती हुई धाक को दर्शाती है।
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