सिटी ब्यूटीफुल चंडीगढ़ की रहने वाली 18 वर्षीय जानवी जिंदल ने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से भारतीय खेल जगत में एक नया अध्याय लिख दिया है। फ्रीस्टाइल स्केटिंग में उन्होंने एक या दो नहीं, बल्कि 11 गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाकर इतिहास रच डाला है। इस उपलब्धि के साथ, वह भारत की दूसरी सबसे ज़्यादा गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाने वाली स्पोर्ट्सपर्सन बन गई हैं, जिनसे आगे सिर्फ़ क्रिकेट के दिग्गज सचिन तेंदुलकर हैं।
जानवी की स्केटिंग की कहानी बड़ी दिलचस्प है। 9 साल की उम्र में, चंडीगढ़ के एक मॉल में उन्होंने अपने पिता से स्केट्स दिलाने की ज़िद की। स्केट्स पहनने के बावजूद जानवी पहली बार में गिरी नहीं, बल्कि उन्होंने कमाल का बैलेंस बना लिया, जिसने उनके माता-पिता को हैरान कर दिया।
चूँकि उन्हें सिखाने वाला कोई नहीं था, उनके पिता ने इंटरनेट का सहारा लिया। जानवी ने YouTube वीडियोज़ देखकर स्केटिंग सीखी और सार्वजनिक सड़कों, मार्केट व स्केटिंग ग्राउंड में घंटों अभ्यास किया। स्कूल के काम को पूरा करने के लिए वह अक्सर रात में प्रैक्टिस करती थीं, जो उनकी अटूट लगन को दर्शाता है।
इस युवा स्केटिंग सनसनी ने अपनी शानदार कला से कुल 11 गिनीज़ रिकॉर्ड्स अपने नाम किए हैं। जुलाई 2025 तक उन्हें पाँच गिनीज़ रिकॉर्ड्स मिल चुके थे, जिनमें 30 सेकंड में 27 स्पिन और एक मिनट में 72 एक-पहिया स्पिन जैसे कठिन करतब शामिल थे।
हाल ही में, उन्होंने फ्रीस्टाइल स्केटिंग में छह नए गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स और जोड़कर अपनी उपलब्धि को दोगुना कर दिया। 11 वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के साथ, वह भारत में सबसे अधिक गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स बनाने वाली युवती बन गई हैं।
जानवी की प्रतिभा केवल रिकॉर्ड तोड़ने तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्केटिंग में कुछ नया करने की सोची और अपने पसंदीदा नृत्य भांगड़ा को स्केट्स पर शामिल कर दिया। स्केट्स पहनकर भांगड़ा करने वाली वह पहली लड़कियों में से एक हैं।
गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अलावा, उन्हें इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में 5 खिताब मिले हैं, जिनमें स्केट्स पर भांगड़ा करने वाली सबसे कम उम्र की लड़की का खिताब और खारदुंग ला पास में सबसे अधिक व्हीली स्पिन शामिल हैं।

जानवी की माँ (सरकारी स्कूल में टीचर) और पिता (एमएनसी कंपनी में जीएम) का पूरा समर्थन उन्हें हमेशा मिला। उनकी यह कहानी सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है। राज्यसभा सांसद और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर सतनाम सिंह संधू ने उनकी उपलब्धियों पर उन्हें सम्मानित किया और ₹11,000 का नकद पुरस्कार दिया। साथ ही, उन्हें चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप के तहत एडमिशन की पेशकश भी की गई।
जानवी जिंदल की यह असाधारण यात्रा दर्शाती है कि दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से न केवल बाधाओं को पार किया जा सकता है, बल्कि विश्व स्तर पर भी इतिहास रचा जा सकता है। जानवी का उद्देश्य है कि उनकी कहानी अन्य बच्चों, विशेष रूप से लड़कियों को खेलों में भाग लेने और अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करे।
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