कुछ लोग विपरीत परिस्थितियों में टूट जाते हैं, लेकिन कुछ दुर्लभ व्यक्तित्व ऐसे भी होते हैं जो अपनी बदकिस्मती को मानवता की सेवा का हथियार बना लेते हैं. डॉ. रितु बियानी जोसेफ उन्हीं असाधारण महिलाओं में से एक हैं. खुद स्तन कैंसर (Breast Cancer) से जूझने और उससे उबरने के बाद, उन्होंने भारत के शहरी, ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इस बीमारी के प्रति जागरूकता फैलाने को अपने जीवन का मिशन बना लिया.
डेंटल सर्जन, पर्वतारोही, स्काईडाइवर और पैराट्रूपर—बहुआयामी व्यक्तित्व वाली डॉ. रितु बियानी ने 'हाई वेज़ बियॉन्ड कैंसर' नामक एक अनूठा अभियान शुरू किया. यह भारत में अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट था, जिसने साहसिक खेलों को कैंसर जागरूकता अभियान से जोड़कर इतिहास रच दिया.
डॉ. रितु ने बताया कि उनके इस असाधारण सफर की शुरुआत 2000 के अगस्त महीने में हुई, जब वह कीमोथेरेपी से गुजर रही थीं. उनके बाल झड़ने लगे थे. उनके क्लिनिक में आई एक दंत रोगी ने जब उनसे पूछा कि क्या वह तिरुपति से आ रही हैं, और जब रितु ने उन्हें अपने स्तन कैंसर के इलाज के बारे में बताया, तो वह यह सोचकर क्लिनिक से चली गई कि कैंसर एक संक्रामक बीमारी है.
इस घटना ने उन्हें महसूस कराया कि शिक्षित लोगों के बीच भी कैंसर को लेकर कितनी भ्रांतियाँ हैं. तभी उन्होंने जागरूकता फैलाने का फैसला किया और अपने यात्रा के शौक को मिशन बना लिया.

डॉ. रितु ने अपने अभियान में पाया कि कैंसर भेदभाव नहीं करता. उन्होंने अपनी बातचीत को अधिक प्रभावी बनाने के लिए ग्राफ़िक्स और तस्वीरों का इस्तेमाल किया. पुरुषों को आकर्षित करने के लिए उन्होंने यह तथ्य सामने रखा कि 1% पुरुषों को भी स्तन कैंसर हो सकता है, जिससे वे अधिक दिलचस्पी के साथ जागरूकता संदेशों को सुनते थे.
भारतीय सेना में कैप्टन (1982-92) के रूप में अपने पूर्व कार्यकाल के अनुभव का उपयोग करते हुए, रितु ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के लोगों और उनकी जीवनशैली से परिचित थीं. उनकी यह यात्रा चुनौतियों से भरी थी, जहाँ वे बिना बिस्तर के सोती थीं और होटलों के बजाय आदिवासी घरों में रहती थीं—यह सब उनके मिशन का अभिन्न हिस्सा था.
डॉ. रितु बियानी का मिशन अब भी जारी है. फिलहाल, वह कॉर्पोरेट, स्कूलों, एमबीए कॉलेजों, अस्पतालों और आर्मी कैंपों में कार्यशालाएँ आयोजित कर रही हैं.
2010 में, उन्होंने अपनी पहली अंतर्राष्ट्रीय जागरूकता कार्यशाला आयोजित की, और अब उनका ध्यान राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कैंसर जागरूकता अभियानों के विस्तार पर केंद्रित है.
डॉ. रितु बियानी जोसेफ की कहानी हमें सिखाती है कि व्यक्तिगत दुख या बीमारी हमें तोड़ नहीं सकती, बल्कि वह हमें दूसरों के लिए मजबूत और करुणापूर्ण बना सकती है. उनका जीवन और उनका मिशन उन सभी के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश है जो अपने जीवन के अनुभवों से दुनिया में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं.
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डॉ. रितु बियानी ने कैंसर से अपनी जंग को दूसरों के लिए उम्मीद की यात्रा में बदल दिया। उन्होंने पूरे देश में घूमकर महिलाओं को कैंसर जागरूकता का संदेश दिया। उनकी “साहस की उड़ान” हर उस महिला के लिए प्रेरणा है जो कठिनाइयों से लड़ रही है।