यह स्टोरी ग्रामीण भारत की उन महिलाओं की प्रेरणादायक कहानी बताती है, जो 'ड्रोन सिस्टर' बनकर खेती को आधुनिक बना रही हैं और अपने सपनों को पूरा कर रही हैं।
एक सपना जो उड़ान भरता हैमिलिए शर्मिला यादव से, एक गृहिणी जो हमेशा से पायलट बनना चाहती थीं। अब 35 साल की उम्र में, वह अपने सपने को साकार कर रही हैं, लेकिन हवाई जहाज नहीं, बल्कि खेती में ड्रोन उड़ाकर।
ड्रोन दीदी योजना: एक क्रांतिशर्मिला, उन सैकड़ों महिलाओं में से एक हैं जिन्हें सरकार की 'ड्रोन सिस्टर' योजना के तहत प्रशिक्षित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य भारतीय कृषि को आधुनिक बनाना, श्रम लागत को कम करना और ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के अवसर देना है।
मानसिकता में बदलावशर्मिला बताती हैं, "पहले महिलाओं के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल था। लेकिन अब यह मानसिकता बदल रही है।" 'ड्रोन सिस्टर' बनने से उन्हें न केवल आर्थिक आजादी मिली है, बल्कि समाज में सम्मान भी मिल रहा है।
अधूरी इच्छा हुई पूरीशर्मिला को जब कोई 'पायलट' कहता है तो उन्हें बहुत गर्व महसूस होता है। वह कहती हैं, "मैं कभी हवाई जहाज में नहीं बैठी, लेकिन अब मुझे लगता है कि मैं हवाई जहाज उड़ा रही हूँ।"
कमाई और सशक्तिकरणशर्मिला अपने काम से हर 150 एकड़ की खेती में छिड़काव के लिए 50,000 रुपये कमाती हैं, जो उनके राज्य की औसत मासिक आय से दोगुना है। यह कमाई उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है।
तकनीक का जादू यह योजना इफको और अन्य उर्वरक कंपनियों द्वारा चलाई जा रही है। प्रशिक्षित महिलाओं को मुफ्त ड्रोन और वाहन दिए जाते हैं। ड्रोन की मदद से एक एकड़ खेत में सिर्फ 5-6 मिनट में छिड़काव किया जा सकता है, जिससे समय और पानी दोनों की बचत होती है। नई पीढ़ी की उड़ान 23 साल की रिफत आरा जैसी युवा महिलाएं भी इस योजना में शामिल हो रही हैं। रिफत कहती हैं, "ड्रोन पायलट कहलाना और अपने पैरों पर खड़ा होना एक शानदार एहसास है।" भारत का नया चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस योजना का समर्थन किया है, उनका मानना है कि 'ड्रोन सिस्टर' भारत की कृषि को क्रांतिकारी दिशा में ले जाएंगी। यह योजना ग्रामीण भारत की महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मान की नई राह दिखा रही है।

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