यह कहानी सिर्फ़ एक त्योहार की नहीं, बल्कि रिश्तों, बलिदान और इंसानियत की है। यह कहानी बताती है कि कैसे एक हादसे ने दो परिवारों को हमेशा के लिए जोड़ दिया।
एक हादसा, एक दर्ददो साल पहले, 2022 में, 15 साल की अनामता का दायाँ हाथ एक दुखद हादसे में बिजली के करंट से जल गया। डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद, उसका हाथ नहीं बचाया जा सका। इस हादसे ने अनामता के जीवन में एक गहरा शून्य पैदा कर दिया।
एक बहादुर परिवार का फैसलाइसी बीच, वलसाड़ (गुजरात) में, शिवम की 9 साल की बहन, रिया बॉबी मिस्त्री, को अचानक ब्रेन हैमरेज हुआ। डॉक्टरों ने उसे 'ब्रेन-डेड' घोषित कर दिया। इस दुख की घड़ी में भी, रिया के परिवार ने एक साहसिक निर्णय लिया और उसके अंग दान करने का फैसला किया।
जीवनदान देने वाला हाथरिया के परिवार के इस महान फैसले से उसकी आँखें, किडनी, लिवर और दायाँ हाथ दान किए गए। रिया का दायाँ हाथ एक 'ग्रीन कॉरिडोर' के ज़रिए मुंबई पहुँचा और डॉक्टरों ने उसे अनामता के शरीर में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित कर दिया। इस हाथ ने अनामता को एक नया जीवन दिया।
एक अनोखा रक्षाबंधनइस साल के रक्षाबंधन पर, अनामता ने एक खास फैसला लिया। वह उसी हाथ से शिवम को राखी बाँधना चाहती थी, जो कभी उसकी बहन रिया का था। मुंबई से वलसाड़ पहुँचकर उसने शिवम की कलाई पर राखी बाँधी और उसे एक घड़ी तोहफे में दी|
"ऐसा लगा जैसे मेरी बहन वापस आ गई है"इस भावुक पल में शिवम ने अनामता को एक ब्रेसलेट पहनाया और कहा, "ऐसा लगा जैसे मेरी बहन वापस आ गई है।" अनामता ने भी शिवम से वादा किया, "यह हाथ अब मेरा नहीं, रिया का है। मैं हर साल यहाँ आऊँगी और राखी बाँधूँगी।"
रिश्तों की डोर से बंधी इंसानियतयह कहानी सिर्फ एक राखी की नहीं, बल्कि दो परिवारों के जुड़ने की है। यह कहानी हमें सिखाती है कि प्यार और अपनापन सीमाओं से परे होता है और इंसानियत के रिश्ते किसी भी बंधन से ज्यादा मज़बूत होते हैं। इस रक्षाबंधन पर, रिया के हाथ ने अनामता और शिवम को भाई-बहन के अटूट रिश्ते में बाँध दिया।

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