14 की उम्र मेंवि धवा, अब बनींसकै ड़ों महि लाओंकी ढाल: बसतं ी देवी की प्रेरणादायक कहानी

उत्तराखडं के पि थौरागढ़ की रहनेवाली बसतं ी देवी का जीवन सघं र्ष और समर्पणर्प की मि साल है। मात्र 14 साल की छोटी उम्र मेंवि धवा हो जानेके बावजदू , उन्होंनेहार नहींमानी और अपनेपि ता के साथ मि लकर समाज सेवा की महिुहिम शरूु की। आज वह महि लाओंके खि लाफ समाज मेंफैली कुरीति यों को दरू करनेऔर पर्या वरण

सरं क्षण के लि ए सक्रि य रूप सेकाम कर रही हैं।

देश मेंऐसी अनेक महि लाएं हैंजि न्होंनेसमाज, सस्ं कृति और पर्या वरण के लि ए अपना जीवन समर्पि तर्पि कि या है। इसी क्रम में, 2022 मेंउत्तराखडं की बसतं ी देवी को देश के चौथेसबसेबड़ेनागरि क सम्मान पद्म श्री से सम्मानि त कि या गया था। इससेपहलेउन्हेंदेश का सर्वो च्च नारी शक्ति परुस्कार भी मि ल चकु ा है।

बाल वि वाह सेआश्रम तक का सफर

पि थौरागढ़ जनपद की बसतं ी देवी की शादी मात्र 12 वर्ष की आयुमेंहो गई थी, लेकि न दर्भाुर्भाग्यवश दो वर्षों के भीतर ही उनके पति का देहांत हो गया। इसके बाद उन्होंनेदसू रा वि वाह नहींकि या। शादी सेपहलेबसतं ी देवी की पढ़ाई-लि खाई नहीं हुई थी। पति की मत्ृयुके बाद वह मायके लौटींऔर 12वींतक की पढ़ाई परूी की। इसी दौरान, वह गांधीवादी समाजसेवी राधा भट्ट के सपं र्क मेंआईं और कौसानी के लक्ष्मी आश्रम मेंआकर रहनेलगीं। यहींसेउनके जीवन मेंएक नया मोड़ आया और उन्होंनेसमाज सेवा को अपना उद्देश्य बना लि या।

कोसी नदी के लि ए सघं र्ष और पर्या वरण सरं क्षण

बसतं ी देवी नेसबसेपहले2003 मेंकोसी नदी के अस्ति त्व को बचानेके लि ए महि लाओंका एक सशक्त सगं ठन बनाया। इस सगं ठन के माध्यम सेउन्होंनेवनों के अधं ाधधंु कटान और दोहन को रोकनेका कार्य कि या।

शरुुआत मेंउन्हेंनि राशा मि ली, लेकि न उन्होंनेदृढ़ता बनाए रखी। वह महि लाओंको यह समझानेमेंकामयाब रहींकि अगर जंगल और पानी नहींबचे, तो सबका जीवन बर्बा द हो जाएगा। उनके इस अभि यान सेपेड़ों के कटान पर रोक लगी और सरकार नेभी उनके प्रयासों की सराहना की।

महि लाओंके लि ए बनींताकत और सहारा

पर्या वरण सरं क्षण के साथ-साथ, बसतं ी देवी नेघरेलूहि सं ा और महि लाओंपर होनेवालेअत्याचारों को रोकनेके लि ए व्यापक जागरूकता अभि यान भी चलाया।

उत्तराखडं के पि थौरागढ़ के कौसानी इलाके मेंउन्होंने200 गाँव की महि लाओंका एक वि शाल समहू तयै ार कि या है। वह 2008 सेही पचं ायतों के भीतर महि लाओंकी स्थि ति को मजबतू करनेपर काम कर रही हैं। पचं ायतों मेंमहि लाओंको आरक्षण दि लानेसेलेकर घरेलूहि सं ा और सामाजि क अत्याचार की शि कार महि लाओं का वह सहारा बन चकु ी हैं। उनकी मदद सेअब तक 100 सेज्यादा गाँव की 200 सेअधि क महि लाएं आत्मनि र्भरर्भ बननेमेंसफल रही हैं।

आज, महि ला सशक्ति करण के क्षेत्र मेंबसतं ी देवी एक मि साल बन चकु ी हैं। पर्या वरण के सरं क्षण और समाज सेवा के कार्यों मेंपरूा जीवन समर्पि तर्पि करनेके लि ए उन्हें2022 मेंपद्म श्री सम्मान सेनवाज़ा गया, जो उनके अथक प्रयासों की पहचान है।

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