हरियाणा की तेज तूफ़ान रीना भट्टी जिसने माउंट एवरेस्ट और ल्होत्से को 20.5 घंटे में झुकाया!

हिसार की बेटी रीना भट्टी: साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल

हिसार के बालक गाँव की बेटी, रीना भट्टी, ने अपनी अद्भुत पर्वतारोहण यात्रा से न केवल राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए हैं, बल्कि हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बनी हैं. एक ट्रैक्टर मिस्त्री की बेटी होने से लेकर दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहराने तक का उनका सफर साहस, समर्पण और अटूट दृढ़ संकल्प की कहानी है.

20.5 घंटे में दोहरी फतेह: एक राष्ट्रीय कीर्तिमान

रीना भट्टी ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में एक ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया, जिसने उन्हें भारत की सबसे तेज महिला पर्वतारोही बना दिया. उन्होंने 2024 में मात्र 20.5 घंटों में दुनिया की दो सबसे ऊंची चोटियों— माउंट एवरेस्ट (8,848.86 मीटर) और उसके पड़ोसी माउंट ल्होत्से (8,516 मीटर)— को फतह कर लिया. यह उपलब्धि उनकी अविश्वसनीय सहनशक्ति और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है.

बर्फीले तूफान में भी अटूट हौसला

रीना के साहसी सफर की शुरुआत उनकी शुरुआती सफलताओं से हुई थी. हिसार के श्यामलाल बाग की इस पर्वतारोही ने 70 घंटों के भीतर लद्दाख की दो चुनौतीपूर्ण चोटियों— माउंट कांग यात्से (6250 मीटर) और माउंट जोजंगो (6240 मीटर)— को फतह कर हरियाणा की पहली पर्वतारोही बनने का रिकॉर्ड बनाया था. यह उपलब्धि उन्होंने क्रमशः 18 जुलाई और 21 जुलाई को तिरंगा फहराकर हासिल की.

इससे पहले, वह माउंट किलिमंजारो और नन जैसी चोटियों को भी सफलतापूर्वक फतह कर चुकी थीं. उनकी यात्रा चुनौतियों से भरी रही— एक बार खराब मौसम के कारण उन्हें चार दिन तक बेस कैंप में रुकना पड़ा, लेकिन उनका संकल्प कभी नहीं डगमगाया.

विश्व स्तर पर तिरंगे का मान

पिछले पांच वर्षों में रीना ने 20 से अधिक पर्वत चोटियों पर तिरंगा फहराया है. उनकी उपलब्धियों में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस (5,642 मीटर) की फतेह भी शामिल है. 15 अगस्त 2022 को, उन्होंने 24 घंटे में इस चोटी को दोनों दिशाओं से फतह कर, ऐसा करने वाली भारत की पहली महिला होने का गौरव प्राप्त किया. इसके अलावा, किर्गिस्तान की तकनीकी रूप से कठिन स्नो लेपर्ड पीक— पीक लेनिन (7,134 मीटर) और नेपाल की माउंट आमा दबलम (6,812 मीटर) पर भी उन्होंने अपनी छाप छोड़ी.

आर्थिक तंगी और बेहिचक संघर्ष

कंप्यूटर साइंस में मास्टर डिग्री धारक और पैनासॉनिक कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत रीना के लिए पर्वतारोहण जैसा महंगा और जोखिम भरा खेल आर्थिक तंगी के कारण एक बड़ी चुनौती रहा है. 2023 में एवरेस्ट की उनकी पहली चढ़ाई मौसमी कठिनाइयों के कारण तब असफल हो गई, जब वह चोटी से मात्र 50 मीटर दूर थीं.

लेकिन हार मानने के बजाय, उन्होंने अगले ही साल 2024 में न सिर्फ एवरेस्ट, बल्कि ल्होत्से को भी रिकॉर्ड समय में फतह किया. रीना ने लोगों से आर्थिक मदद की अपील की है और हरियाणा सरकार से ए-ग्रेड सरकारी नौकरी और वित्तीय सहायता की गुहार लगाई है, ताकि वह अपने साहसिक सफर को जारी रख सकें और देश का नाम और रोशन कर सकें.

सामाजिक बदलाव की मशाल

रीना भट्टी केवल एक पर्वतारोही नहीं हैं, बल्कि सामाजिक रूढ़ियों को तोड़ने वाली एक मशाल भी हैं. उन्होंने विश्व की सबसे लंबी रिले दौड़ “Depression Against Running” में भाग लिया और 10,000 पुश-अप्स पूरे करने का ऑक्सफोर्ड वर्ल्ड रिकॉर्ड भी बनाया.

उनका मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में, खासकर लड़कियों को, साहसिक कार्यों के लिए पर्याप्त प्रोत्साहन नहीं मिलता. उनका संदेश स्पष्ट है: "एवरेस्ट पर चढ़ाई ने मुझे सिखाया कि सपने जेंडर नहीं, हौसला देखते हैं।" वह उम्मीद करती हैं कि सरकार और समाज उनकी उपलब्धियों का समर्थन करेगा, ताकि हर भारतीय बेटी पर्वतों की तरह बुलंद सपने देख सके और उन्हें पूरा कर सके.

क्या आप रीना भट्टी को आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए किसी अभियान या सरकारी योजना के बारे में जानकारी चाहते हैं?

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