वन अम्मा की लगन ने बंजर जंगल को किया हरा-भरा !

वन अम्मा की लगन ने बंजर जंगल को किया हरा-भरा

उत्तराखंड के चंपावत जिले के मानर गांव में भागीरथी देवी, जिन्हें अब प्यार से "वन अम्मा" कहा जाता है, ने एक बंजर जंगल को अपनी अथक मेहनत से फिर से जीवन दिया है। पिछले 20 सालों से उनकी दिनचर्या नहीं बदली है; वह हर सुबह जंगल की चौकीदारी के लिए निकल पड़ती हैं, और जरूरत पड़ने पर रात में भी अकेले ही जंगल की सुरक्षा करती हैं। अवैध कटाई करने वालों को उन्होंने कई बार पकड़ा और उन पर जुर्माना भी लगाया। उनकी अनुपस्थिति में उनके बेटे या बहू जंगल की जिम्मेदारी संभालते हैं, जो जंगल के प्रति उनके गहरे समर्पण को दर्शाता है।

मानर गांव का सूखा जंगल

मानर गांव, जो समुद्र तल से करीब 6,000 फीट की ऊंचाई पर है, लगभग 100 परिवारों और 700 लोगों की आबादी वाला है। साल 2000 तक, गांव का 11.6 हेक्टेयर का जंगल पेड़ों की अत्यधिक कटाई और चराई के कारण पूरी तरह से बंजर हो गया था। ग्रामीण भीम सिंह बिष्ट बताते हैं कि उस समय जंगल का मूल स्वरूप उन्होंने कभी देखा ही नहीं था। जंगल के खत्म होने से पानी, चारा और लकड़ी जैसे बुनियादी संसाधनों का संकट खड़ा हो गया था, जिसका सबसे बुरा असर महिलाओं पर पड़ा। उन्हें चारा और लकड़ी लाने के लिए अपने घर से 7-8 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था, जिसमें 5-6 घंटे बर्बाद होते थे।

वन पंचायत का पुनरुद्धार

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों को जंगल को फिर से संरक्षित करने की आवश्यकता महसूस हुई। भागीरथी देवी ने महिलाओं को संगठित किया और उन्हें इसके लिए राजी किया। साल 2000 में, सामूहिक उद्देश्य के लिए वन पंचायत का गठन किया गया। उत्तराखंड में वन पंचायत की अवधारणा ब्रिटिश काल से चली आ रही है, जब स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए 1931 में इसका प्रावधान किया गया था। यह भारत में प्राकृतिक संसाधनों के सह-प्रबंधन का सबसे शुरुआती उदाहरण है।

भागीरथी देवी बनीं सरपंच

वन पंचायत के गठन के बाद, जंगल की व्यक्तिगत जिम्मेदारी लेने के लिए कोई तैयार नहीं था। तब भागीरथी देवी आगे आईं। पढ़ी-लिखी न होने के बावजूद, उन्होंने जंगल को फिर से बनाने का दृढ़ संकल्प लिया। वह सर्वसम्मति से वन पंचायत की सरपंच चुनी गईं और 2024 तक इस पद पर बनी रहीं। उन्होंने महसूस किया कि जंगल के बिना महिलाओं और आने वाली पीढ़ियों का गुजारा मुश्किल होगा, और इसी सोच के साथ उन्होंने जंगल को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया।

सामूहिक प्रयास और वैज्ञानिक सहायता

शुरुआती दो-तीन वर्षों तक, गांव की महिलाओं ने अपने संसाधनों से जंगल की सफाई और बाड़बंदी की। इसी दौरान, वे सिल्वी पाश्चर के विकास के लिए काम कर रहे गैर-लाभकारी संगठन बाइफ (BAIF) के संपर्क में आईं। बाइफ ने मानर गांव को अपनी परियोजना में शामिल किया और 2003-04 से जंगल में व्यवस्थित और वैज्ञानिक गतिविधियां शुरू हुईं। बाइफ के डॉ. दिनेश प्रसाद रतूड़ी बताते हैं कि उन्होंने 90 परिवारों को संगठित किया और लोगों के आपसी मतभेद सुलझाए। डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST), सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और नाबार्ड के सहयोग से यह परियोजना लंबे समय तक चली।

जंगल का कायाकल्प

बाइफ के हस्तक्षेप के बाद, श्री सिद्ध नरसिंह बाबा चारा समिति का गठन हुआ। महिलाओं ने शुरुआती प्रशिक्षण के बाद जंगल की पत्थरों और कंटीले पौधों से बाड़बंदी की। झाड़ियों और लैंटाना जैसी आक्रामक प्रजातियों की सफाई के बाद, बांज, फल्याट, अंगू जैसे घास और चारा देने वाले पौधे लगाए गए। नमी और पानी के रिचार्ज के लिए गड्ढे खोदे गए, और वन विभाग से पौधे लाकर रोपे गए। समिति की पहली अध्यक्ष मंजू मनराल बताती हैं कि वे जंगल से दो किलोमीटर दूर घर से पानी लाकर पौधों को सींचती थीं।

“वन अम्मा” की चौकीदारी और सामुदायिक प्रबंधन

समिति ने भागीरथी देवी को चौकीदारी का दायित्व सौंपा, और हर घर ने उनके मासिक वेतन के लिए 20 रुपए का योगदान दिया। शुरुआती दो वर्षों तक जानवरों की चराई पूरी तरह प्रतिबंधित थी ताकि पौधे पनप सकें। मंजू मनराल बताती हैं कि दो साल में घास और पांच से छह साल में पेड़ बड़े हो गए। जंगल का संपूर्ण प्रबंधन शुरुआत से महिलाओं द्वारा संचालित वन पंचायत के हाथों में रहा। वर्तमान में, भागीरथी देवी की बहू सुनीता सरपंच हैं और जंगल के माइक्रो प्लान पर काम कर रही हैं। वन पंचायत समय-समय पर जंगल को चारा, लकड़ी और पत्तों के लिए खोलने का निर्णय लेती है, और हर परिवार को इसके लिए 10 रुपए समिति को देने होते हैं, जो जंगल के रखरखाव पर खर्च किए जाते हैं। समिति के खाते में अभी करीब 60 हजार रुपए जमा हैं। समय पर सूखी पत्तियों को हटाने और निगरानी के कारण आज तक वन पंचायत के जंगल में आग लगने की कोई घटना नहीं हुई है।

भागीरथी देवी की यह कहानी एक प्रेरणा है कि कैसे एक व्यक्ति की लगन और सामुदायिक सहयोग से बंजर भूमि को भी हरा-भरा किया जा सकता है।

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