मनु गुलाटी: बच्चों के लिए ‘हैप्पी प्लेस’ बनाने वाली शिक्षिका की प्रेरणादायक यात्रा !

दिल्ली के सरकारी स्कूल की शिक्षिका मनु गुलाटी का जीवन एक प्रेरणा है

यह कहानी है सपनों, चुनौतियों और शिक्षा के प्रति अटूट समर्पण की. उनके माता-पिता दोनों सरकारी शिक्षक थे, और घर का माहौल हमेशा पढ़ने-लिखने और आज़ादी से साँस लेने वाला रहा. बचपन में उन्होंने अपने माता-पिता से स्कूल, बच्चों के संघर्ष, मेहनत और देश के भविष्य की अनगिनत कहानियाँ सुनीं.

कहानियों में बनी 'हैप्पी प्लेस' की छवि

मनु गुलाटी के मन में, इन कहानियों ने स्कूल और शिक्षकों की एक आदर्श छवि उकेरी—एक ऐसी 'हैप्पी प्लेस' जहाँ बच्चे बोरिंग विषयों को मज़ेदार तरीके से पढ़ते थे, और शिक्षक देश के भविष्य को संवारते थे. इसी छवि से प्रेरित होकर उन्होंने टीचर बनने का फैसला किया.

इंग्लिश ऑनर्स में ग्रेजुएशन, इंग्लिश में मास्टर डिग्री, टीचर ट्रेनिंग डिप्लोमा और बीएड पूरा करने के बाद, उन्होंने 2004 में निजी स्कूल से शुरुआत की और 2006 में सरकारी स्कूल में उनका चयन हो गया.

जब हकीकत ने तोड़ी कल्पना: पिता की सीख से बदला नज़रिया

जब मनु पंजाबी बाग स्थित सर्वोदय कन्या विद्यालय-2 पहुँचीं और 1 से 5वीं कक्षा के बच्चों को पढ़ाने की ज़िम्मेदारी मिली, तो स्कूल का माहौल देखकर वह परेशान हो गईं. यह उनके बचपन की कहानियों में बने 'हैप्पी प्लेस' से बहुत अलग था.

तब उनके पिता ने एक ऐसी बात कही जिसने उनका नज़रिया हमेशा के लिए बदल दिया. पिता ने कहा: "मनु, इस स्कूल में जो बच्चे तुम्हारे स्टूडेंट हैं, वे उन घरों से आते हैं, जिन्हें दो वक्त का खाना भी ठीक से नसीब नहीं होता... उनके पास संसाधनों का भारी अभाव है. ऐसे में क्या तुम्हें नहीं लगता कि उन बच्चों को भी अच्छे शिक्षकों से पढ़ने का मौका मिलना चाहिए?"

उस रात, मनु ने बच्चों के बारे में सोचा और अगली सुबह, उनका दृष्टिकोण पूरी तरह से बदल चुका था. तभी से उनका हर प्रयास इन बच्चों को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाने की ओर समर्पित है.

क्लासरूम को बनाया मज़ेदार: प्रयोग, मस्ती और सीख

2011 में उन्हें 6वीं से 10वीं तक की इंग्लिश पढ़ाने की ज़िम्मेदारी मिली. उन्होंने ठान लिया कि इंग्लिश को 'बोरिंग सब्जेक्ट' नहीं रहने देंगी.

  • उन्होंने राइम, हॉलीवुड के गाने, आर्ट, साइंस, टेक्नोलॉजी, म्यूजिक, डांस और क्राफ्ट सब कुछ ट्राई किया ताकि बच्चे विषय को एन्जॉय कर सकें.
  • भले ही उनके पढ़ाने के इस अनोखे तरीके पर कुछ अभिभावकों और साथी शिक्षकों ने आपत्ति जताई, लेकिन मनु को पता था कि उनके बच्चे सीख रहे हैं.
  • इसका नतीजा यह हुआ कि उनके छात्र न तो छुट्टी करते थे और न ही होमवर्क से बचने के लिए बहाने बनाते थे, क्योंकि वे इस पैटर्न को 'एन्जॉय' कर रहे थे.

मनु गुलाटी का मानना है, "अगर पाँच मिनट डांस करने के नाम से बच्चे तीन घंटे मन लगाकर पढ़ रहे हैं, याद कर रहे हैं तो इसमें क्या गलत है?"

राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय सम्मान और एक यादगार लम्हा

उनके इनोवेटिव टीचिंग पैटर्न के लिए उन्हें कई बड़े सम्मान मिले:

  • 2015: भारत सरकार द्वारा नेशनल आईसीटी अवार्ड से सम्मानित किया गया.
  • 2018: अमेरिका की ब्राइट स्कॉलरशिप के लिए चयन हुआ, जहाँ उन्होंने 80 देशों के सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों के साथ शिक्षण के नए तरीके सीखे.
  • 2018: अमेरिका से लौटने के बाद राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार से नवाजा गया.
  • 2020: अमेरिकी फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप के दिल्ली दौरे के दौरान, उन्हें मूर्तिबाग स्थित सरकारी स्कूल का टूर कराने की ज़िम्मेदारी मिली. मेलानिया ने न केवल उनकी 'हैप्पीनेस क्लास' देखी, बल्कि भारत लौटने के एक साल बाद ट्वीट करके उनकी तारीफ भी की, जो उनके लिए एक अविस्मरणीय गौरव का क्षण था.

'स्मार्ट टीचर' जो अब संवार रही हैं शिक्षकों का भविष्य

साल 2018 में उन्हें मेंटोर टीचर बना दिया गया. अब वह बच्चों को सीधे पढ़ाने के बजाय, दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के साथ मिलकर टीचिंग पैटर्न को बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं. वह अपने क्लास और बच्चों की गतिविधियों के वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करती हैं, ताकि टीचिंग कम्युनिटी के साथ विचार-विमर्श कर सकें.

मनु गुलाटी अपने काम को पैशन मानती हैं और अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति सुमीत गुलाटी के सहयोग के कारण अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ में बेहतरीन संतुलन बनाए रखती हैं. उनका मानना है कि वह आज जो कुछ भी हैं, अपने छात्र-छात्राओं की वजह से हैं—जो उन्हें बिना किसी स्वार्थ के प्यार और सम्मान देते हैं.

क्या आप दिल्ली सरकार के किसी अन्य शिक्षा पहल के बारे में जानना चाहेंगे?

(जैसे 'हैप्पीनेस करिकुलम') जिस पर मनु गुलाटी काम करती हैं?

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