बेबी सहवाग का तूफ़ान शेफाली वर्मा—दसवीं की नाकामी से वर्ल्ड कप के इतिहास तक का सफर!

हरियाणा की शेफाली वर्मा: भारतीय महिला क्रिकेट की 'लेडी सहवाग'

हरियाणा के रोहतक से निकलीं धुआंधार सलामी बल्लेबाज शेफाली वर्मा आज सिर्फ 21 साल की उम्र में भारतीय महिला क्रिकेट का चेहरा बन चुकी हैं. उन्हें उनकी निडर, आक्रामक और ताबड़तोड़ बल्लेबाजी शैली के कारण 'लेडी सहवाग' या 'बेबी सहवाग' के नाम से जाना जाता है. शेफाली की कहानी संघर्ष, अटूट हौसले और रूढ़िवादिता को तोड़कर इतिहास रचने की एक प्रेरणादायक दास्तान है.

वर्ल्ड कप फ़ाइनल की 'प्लेयर ऑफ द मैच'

हाल ही में महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शेफाली ने बल्ले और गेंद दोनों से अविश्वसनीय प्रदर्शन किया, जिसने भारत को 52 साल में पहली बार वर्ल्ड कप का खिताब दिलाया.

  • उन्होंने 87 रनों की यादगार पारी खेली.
  • 2 महत्वपूर्ण विकेट चटकाए.

इस ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द मैच' चुना गया. इसी के साथ, उन्होंने दो विश्व रिकॉर्ड बनाए:

  • वह पुरुष और महिला क्रिकेट विश्व कप के इतिहास में फाइनल या सेमीफाइनल में 'प्लेयर ऑफ द मैच' का पुरस्कार जीतने वाली सबसे युवा खिलाड़ी बनीं.
  • वह वर्ल्ड कप फाइनल में अर्धशतक (50+ रन) बनाने और 2 या उससे अधिक विकेट लेने वाली दुनिया की पहली क्रिकेटर हैं.

लड़का बनकर ट्रेनिंग: संघर्ष से भरी शुरुआत

28 जनवरी 2004 को जन्मीं शेफाली का क्रिकेट से परिचय महज़ 8 साल की उम्र में हुआ. इसका श्रेय उनके पिता संजीव वर्मा (जो खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे) को जाता है.

  • रोहतक में लड़कियों के लिए क्रिकेट एकेडमी न होने के कारण, शेफाली को शुरुआती दिनों में अपने बाल लड़कों की तरह कटवाने पड़े और लड़का बनकर ट्रेनिंग लेनी पड़ी.
  • उनके पिता संजीव वर्मा जूलरी शॉप चलाते थे और उनके पहले कोच और सबसे बड़े समर्थक भी रहे.
  • 2013 में, जब क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर अपना आखिरी रणजी मैच रोहतक में खेल रहे थे, तब नन्ही शेफाली उन्हें देखने के लिए घंटों अपने पिता के कंधों पर खड़ी रहीं—यह घटना उनके जुनून को दर्शाती है.

15 साल की उम्र में रिकॉर्ड की झड़ी

शेफाली ने मात्र 15 साल की उम्र में (2019 में) अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में डेब्यू किया और रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी:

  • उन्होंने महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर का 30 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कम उम्र में अंतर्राष्ट्रीय अर्धशतक लगाने वाली भारतीय खिलाड़ी होने का गौरव हासिल किया.
  • वह सबसे कम उम्र में तीनों इंटरनेशनल फॉर्मेट (टेस्ट, वनडे और टी20) में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली खिलाड़ी भी बनीं.
  • 2023 में, उन्होंने भारत को अंडर-19 महिला टी20 विश्व कप का पहला खिताब दिलाने में कप्तानी की.

प्रेरणा की मिसाल

शेफाली वर्मा का सफर यह दर्शाता है कि प्रतिभा, जुनून और परिवार के सहयोग के दम पर लड़कियां हर रूढ़िवादिता को तोड़कर दुनिया के मंच पर अपना नाम रोशन कर सकती हैं—चाहे वह क्रिकेट का मैदान हो या शैक्षणिक सफलता.

क्या आप महिला क्रिकेट विश्व कप 2025 के फाइनल में भारतीय टीम की इस ऐतिहासिक जीत के बारे में और जानना चाहेंगे?

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