दिहाड़ी मज़दूरों की बेटी, वर्ल्ड कप विनर उमा छेत्री !

यह कहानी है अटूट विश्वास, अथक परिश्रम और सपनों को हकीकत में बदलने के ज़ज़्बे की

यह कहानी है असम के काजीरंगा नेशनल पार्क के पास बोकाखात कस्बे की उमा छेत्री की, जिनके माता-पिता दिहाड़ी मज़दूरी करते हैं और जो खुद आज वर्ल्ड कप विजेता भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं.

ऐतिहासिक जीत और प्रेरणादायक संघर्ष

रविवार को मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इतिहास रच दिया, जब उन्होंने साउथ अफ्रीका को हराकर 52 साल में पहली बार विमेंस वर्ल्ड कप का ख़िताब जीता. इस ऐतिहासिक जीत में एक नाम उमा छेत्री का भी है, जिनकी संघर्ष-गाथा हर किसी को प्रेरित करती है.

रिक्शा चलाकर भाई ने, मज़दूरी कर माँ ने बुना सपना

उमा छेत्री का बचपन घोर आर्थिक तंगी में बीता. उनके माता-पिता खेतों में दिहाड़ी मज़दूरी करते थे, और उमा ने भी अपने परिवार की मदद के लिए खेतों में काम किया है. लेकिन मुश्किल हालातों ने उनके सपनों को मरने नहीं दिया.

  • तीन साल की उम्र में उनकी माँ ने उन्हें जन्मदिन पर एक प्लास्टिक का बैट उपहार में दिया था, जिसने शायद भविष्य की वर्ल्ड चैंपियन की नींव रख दी.
  • उमा के क्रिकेटर बनने के सपने को पूरा करने के लिए उनके भाई ने रिक्शा तक चलाया.
  • क्रिकेट पर पूरा ध्यान देने के लिए उन्हें 10वीं के बाद पढ़ाई भी छोड़नी पड़ी.

आज, 23 वर्षीय यह धाकड़ विकेटकीपर-बल्लेबाज अपने त्याग और अटूट विश्वास के बल पर भारत की वर्ल्ड कप विजेता टीम का हिस्सा बनकर, उस संघर्ष को सफलता के शिखर तक ले गई हैं.

16 किलोमीटर पैदल चलकर तय किया सफर

कठिनाई को अपनी पहचान न बनने देने वाली उमा ने, आठ साल की छोटी सी उम्र में ही अपनी असाधारण लगन का प्रमाण दे दिया था. वह रोज़ 16 किलोमीटर पैदल चलकर क्रिकेट ट्रेनिंग सेंटर जाती थीं.

उनकी यह कठोर मेहनत और लगन ही उन्हें राष्ट्रीय टीम तक लेकर आई. 26 अक्टूबर 2025 को उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ वर्ल्ड कप ग्रुप मैच में वनडे डेब्यू किया और उपकप्तान स्मृति मंधाना से अपनी डेब्यू कैप प्राप्त की. वह असम की दूसरी महिला खिलाड़ी बनीं, जिन्होंने भारत के लिए वनडे खेला.

मैदान पर भी सोना: उपलब्धियों की एक लंबी लिस्ट

वर्ल्ड कप जीत से पहले भी, उमा छेत्री ने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था:

  • वह साल 2023 में हांग्जो में हुए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने वाली भारतीय टीम का भी हिस्सा थीं.
  • उन्होंने 2023 में यूपी वॉरियर्स के लिए महिला प्रीमियर लीग (WPL) में डेब्यू किया था.
  • वनडे डेब्यू से पहले, उन्होंने भारत के लिए सात T20I मैच खेले थे.

संघर्ष से सफलता तक

एक छोटे से कस्बे की लड़की से लेकर वर्ल्ड चैंपियन बनने तक का उमा छेत्री का यह सफर, उन सभी के लिए एक शक्तिशाली संदेश है जो मानते हैं कि सपने देखने के लिए दौलत नहीं, बल्कि दिल में आग और आँखों में आत्मविश्वास होना चाहिए. उन्होंने इतिहास रचकर देश का तिरंगा शान से लहराया है.

1 Comment

  1. Anonymous says:

    हर सफलता को ज़रूरत से ज़्यादा ड्रामाई बना देना भी ठीक नहीं है। मेहनत और टैलेंट अपनी जगह हैं, पर हर बात को ‘संसेशनल’ बनाकर पेश करना अच्छी आदत नहीं।

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