टीम इंडिया की धाकड़ क्रिकेटर अमनजोत कौर ने अपने संघर्ष और अटूट दृढ़ संकल्प से इतिहास रच दिया है. पंजाब के मोहाली की रहने वाली यह 25 वर्षीय खिलाड़ी अब उस भारतीय महिला क्रिकेट टीम का हिस्सा हैं, जिसने 52 साल में पहली बार महिला वर्ल्ड कप का खिताब जीतकर देश को गौरव दिलाया है. अमनजोत का यह सफर बताता है कि सपने देखने के लिए दौलत नहीं, बल्कि हौसले की जरूरत होती है.
अमनजोत कौर का परिवार एक मिडिल क्लास पृष्ठभूमि से आता है, जहाँ उनके पिता पेशे से कारपेंटर हैं और मोहाली में एक दुकान पर काम करते हैं. उनकी बहन कमलजोत कौर ने बताया कि अमनजोत की शुरुआती यात्रा कितनी संघर्षपूर्ण थी.
यह कहानी उन लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा है, जिनके माता-पिता सीमित संसाधनों के बावजूद अपने बच्चों के सपनों को पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं.
अमनजोत कौर ने महिला वर्ल्ड कप 2025 के फाइनल में भी अपनी बहुमूल्य उपस्थिति दर्ज कराई. भारत ने साउथ अफ्रीका को 52 रनों से हराकर पहली बार यह खिताब जीता.
अमनजोत के इस प्रदर्शन ने दिखाया कि वह दबाव के क्षणों में भी चट्टान की तरह खड़ी रह सकती हैं, जिसने उन्हें एक नेशनल हीरो बना दिया.

अमनजोत कौर की बहन कमलजोत कौर ने इस जीत पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा, "हमने अमनजोत की जर्नी देखी है... क्रिकेट किट बहुत महंगी होती थी. इसे खरीदने के लिए हमने काफी संघर्ष किया... हमने यह देखा है कि सपने आखिरकार सच होते हैं."
नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में भारतीय महिला टीम की यह ऐतिहासिक जीत, अमनजोत कौर जैसी खिलाड़ियों के त्याग, आत्मविश्वास और अटूट इच्छाशक्ति का परिणाम है.
क्या आप महिला वर्ल्ड कप 2025 विजेता टीम की किसी और संघर्षरत खिलाड़ी के बारे में जानना चाहेंगे?
This will close in 0 seconds
1 Comment
संघर्ष ही सफलता की असली कुंजी है, पिता और बेटे दोनों को सलाम, जिसके पिता ने त्याग किया हो, उसे रोक पाना नामुमकिन है